किसानों का गन्ने की खेती के प्रति बढ़ा रुझान

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किसानों का गन्ने की खेती के प्रति बढ़ा रुझान

महराजगंज। गन्ने की खेती के प्रति किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है। वर्ष 2020 में कराए गए सर्वे में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल 16500 था। इस बार के सर्वे में यह आंकड़ा करीब 18 हजार हेक्टेयर के पास पहुंच गया है। करीब 1400 से अधिक हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी यह दर्शाती है कि गन्ने की खेती के प्रति किसानों का रुझान फिर बढ़ने लगा है।

एक दौर था जब जिले में फरेंदा, घुघली, सिसवा व गड़ौरा में चीनी मिल संचालित होती थी। इसे पूर्वांचल का चीनी का कटोरा कहा जाता था। समय के साथ एक-एक कर फरेंदा व घुघली चीनी मिल बंद हो गई। बकाए को चुकता न करने व कानूनी दावपेंच में उलझने के बाद दो वर्ष तक गड़ौरा चीनी मिल नहीं चली तो किसानों का न्ने की खेती से मोहभंग होने लगा। प्रशासन, गन्ना विभाग व मिल प्रबंधन के प्रयासों से दो साल से बंद पड़ी गड़ौरा चीनी मिल को वर्ष 2020-21 के पेराई सत्र में चलाया गया तो न सिर्फ किसानों के पुराने भुगतान का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि किसानों का रुझान एक बार फिर गन्ने की खेती की तरफ हुआ है। यदि नियमित रूप से गड़ौरा व सिसवा चीनी मिल चले तो चीनी उत्पादन के क्षेत्र में जिले का नाम राज्य स्तर पर स्थापित हो सकेगा। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि गन्ने की खेती के प्रति किसानों का बढ़ता रुझान सुखद खबर है। इससे अन्य किसान प्रोत्साहित होंगे।

तीन परिषदों में दर्ज की गई बढ़ोत्तरी

जिले के सिसवा परिषद में इस बार लगभग 9500 हेक्टेयर, घुघली परिषद में लगभग 5100 हेक्टेयर, गड़ौरा परिषद में लगभग 2950 हेक्टेयर तथा फरेंदा में लगभग 500 हेक्टेयर में गन्ने की खेती कराई जाएगी। इस बार फरेंदा छोड़ शेष सभी तीन परिषदों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। गन्ने के क्षेत्रफल की बढ़ोत्तरी होने से सिसवा व गड़ौरा क्षेत्र के किसानों को सर्वाधिक लाभ होगा।

Source- www.amarujala.com

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